देशभर में E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल के मिश्रण को लेकर बहस तेज है। सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि कई उपभोक्ता और वाहन मालिक इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
चल रही बहस के बीच ज़िला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग रायपुर (छत्तीसगढ़)ने एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई ई20 फ़्यूल पावर्ड कार शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराए.अगर कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है, तो उसे वाहन की पूरी क़ीमत समेत कुल 20 लाख 50 हज़ार 494 रुपये लौटाने होंगे.इसके अलावा आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये और मुक़दमे के ख़र्च के रूप में 10 हज़ार रुपये देने का भी आदेश दिया है.
बहस के प्रमुख मुद्दे
सरकार के पक्ष में तर्क
•कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
•गन्ना और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को लाभ मिलेगा।
•इथेनॉल मिश्रण से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है और यह स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक कदम माना जाता है।
उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों की चिंताएँ
•कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि E20 से माइलेज में कमी महसूस होती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है।
•2023 से पहले बने कुछ वाहनों की E20 अनुकूलता को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं।
•कई लोगों ने मांग की है कि E20 के साथ-साथ शुद्ध पेट्रोल या कम मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए।
सरकार का जवाब
•सरकार का कहना है कि E20 से वास्तविक माइलेज में कमी सामान्यतः लगभग 3–5% तक हो सकती है, लेकिन इसके बदले प्रदूषण कम होता है और ईंधन की गुणवत्ता (ऑक्टेन रेटिंग) बेहतर होती है।
•सरकार ने यह भी कहा है कि पूरे देश में एक साथ शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 उपलब्ध कराना वितरण व्यवस्था और लागत के लिहाज से व्यावहारिक नहीं है।
हालिया अध्ययन
•हाल में प्रकाशित एक IIT Kanpur अध्ययन में कहा गया कि E20 से इंजन को व्यापक नुकसान होने के ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले। अध्ययन के अनुसार, इंजन क्षति संबंधी कई दावे उपलब्ध परीक्षणों से पुष्ट नहीं होते।
E20 पर बहस का केंद्र यह है कि सरकार इसके दीर्घकालिक राष्ट्रीय लाभ—ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण—पर जोर दे रही है, जबकि उपभोक्ता तत्काल प्रभाव जैसे माइलेज, पुराने वाहनों की अनुकूलता और ईंधन विकल्प की उपलब्धता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
