उत्तराखंड में यूनिफ़ाइड ज़ोनिंग रेगुलेशन 2025 (Unified Zoning Regulation) अधिसूचित किया जा चुका है। इस नियम के दायरे में आवासीय योजनाएं, कृषि, पार्क, पशुपालन, आंगनबाड़ी, आश्रम, सभागार, बैंक्वेट हॉल, बर्ड सेंचुरी, बॉटनिकल गार्डन, बोर्डिंग हाउस, ईंट भट्ठा, कब्रिस्तान, बस स्टैंड और कॉलेज जैसी 152 गतिविधियां शामिल हैं। शहरों में किसी भी भूमि पर निर्माण या गतिविधि शुरू करने से पहले उसके ज़ोन और निर्धारित उपयोग (Land Use) का मिलान करना अनिवार्य कर दिया गया है ।
नए नियम के अंतर्गत शहरों में किसी भी भूमि पर निर्माण या गतिविधि शुरू करने से पहले उसके ज़ोन और निर्धारित उपयोग (Land Use) का मिलान करना अनिवार्य कर दिया गया है और निर्माण मंजूरियों की प्रक्रिया में मास्टर प्लान, जोनल प्लान और लैंड-यूज़ की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बनाया गया है।विकास प्राधिकरण स्तर पर मिलने वाली मंजूरियों को सीमित कर दिया गया है और विशेष मामलों में निर्णय अब शासन स्तर पर नगर नियोजन की संस्तुति के बाद ही लिए जाएंगे।
प्रमुख फायदे
नए प्रावधानों के तहत केवल सड़क चौड़ी होने के आधार पर आवासीय भूमि पर व्यावसायिक भवनों को अनुमति देने की गुंजाइश कम होगी। होटल, अस्पताल, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स आदि के लिए संबंधित commercial land use का अनुपालन महत्वपूर्ण होगा।इससे आवासीय कॉलोनियों में अचानक बढ़ती दुकानों, कार्यालयों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से होने वाले दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
UZR में अलग-अलग जोन और गतिविधियों के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 152 प्रकार की गतिविधियों को जोनिंग व्यवस्था में वर्गीकृत किया गया है।इसका उद्देश्य यह है कि किसी क्षेत्र का विकास उसकी निर्धारित भूमिका के अनुरूप हो—जैसे आवासीय, वाणिज्यिक, संस्थागत, कृषि अथवा अन्य उपयोग।
उत्तराखंड के तेजी से बढ़ते शहरों में कई जगह आवासीय क्षेत्रों में सड़क किनारे दुकान, होटल, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती रही हैं। नए नियमों से land-use के विपरीत निर्माण को नियंत्रित करने का आधार मजबूत हो सकता है।
जब बड़े व्यावसायिक या संस्थागत भवन निर्धारित जोन में ही विकसित होंगे, तो उनके लिए सड़क, पार्किंग और अन्य शहरी सुविधाओं की योजना बनाना अपेक्षाकृत आसान होगा। यह विशेष रूप से देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहरों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
एक ही राज्य में अलग-अलग स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्माण स्वीकृति में पैदा होने वाली अस्पष्टता कम करने की कोशिश की गई है। निर्धारित land use और zoning के विपरीत निर्माण होने पर कार्रवाई के लिए नियामकीय आधार अधिक स्पष्ट होगा।
UZR के साथ राज्य ने भवन मानचित्र स्वीकृति और land-use change की प्रक्रियाओं में भी बदलाव किए हैं। UHUDA के रिकॉर्ड में दिसंबर 2025 में भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में संशोधन तथा CLU प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने संबंधी आदेश दर्ज हैं।
यह व्यवस्था केवल आज के निर्माण को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। Town Planning Scheme और Land Pooling Scheme जैसे उपायों के साथ इसे लागू करने पर सड़क, आवास, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे की दीर्घकालिक योजना बनाने में मदद मिल सकती है। राज्य ने 2025 में इन दोनों योजनाओं के लिए अलग नियम भी अधिसूचित किए हैं।
असली चुनौती लागू करने की होगी
UZR से नियम स्पष्ट होने के बावजूद इसका परिणाम क्रियान्वयन, पुराने अनियमित निर्माणों से निपटने, मास्टर प्लान के अद्यतन, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगा।
खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पहले से विकसित मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों के लिए संक्रमण व्यवस्था क्या होगी और छोटे दुकानदारों/व्यवसायों पर नए land-use नियमों का व्यावहारिक प्रभाव कितना पड़ेगा।
