उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान जारी है. बाहरी राज्यों से कूटरचित दस्तावेजों (Forged documents) के आधार पर बनवाए गए संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. अब तक 94 संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस अपने कब्जे में लेकर उनसे जुड़े 119 लाइसेंसी हथियार थानों में जमा कराए गए हैं. पुलिस का कहना है कि इन सभी लाइसेंसों का संबंधित राज्यों में जाकर सत्यापन कराया जाएगा. यदि जांच में लाइसेंस फर्जी पाए गए, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 94 संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस अपने कब्जे में ले लिए हैं. इन लाइसेंसों से जुड़े 119 लाइसेंसी हथियार भी संबंधित धारकों से लेकर विभिन्न थानों में जमा करा दिए गए हैं. पुलिस अब इन सभी लाइसेंसों की वैधता की जांच के लिए संबंधित राज्यों के जिलों में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करेगी.

पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय गणपति ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि कुछ लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, बिहार समेत कई अन्य राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाए. बाद में उन्हें उत्तराखंड में स्थानांतरित कराकर वैध हथियारों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. इस सूचना के आधार पर व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया.
एसएसपी ने बताया कि इससे पहले काशीपुर क्षेत्र में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के दो मामलों का खुलासा किया गया था. इन मामलों में दो मुकदमे दर्ज कर अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इन गिरफ्तारियों के बाद पूरे जिले में फर्जी लाइसेंसों की पहचान और सत्यापन का अभियान और तेज कर दिया गया.
जांच के दौरान वर्ष 2001 से वर्ष 2026 तक जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड खंगाला गया. इस दौरान कुल 678 ऐसे शस्त्र लाइसेंस चिह्नित हुए, जो अन्य राज्यों से जारी किए गए थे और वर्तमान में उधम सिंह नगर जिले में उपयोग किए जा रहे थे. इन सभी लाइसेंसों की जांच के लिए जिला स्तर पर तीन विशेष सत्यापन टीमें गठित की गईं. इनमें दो टीमें रुद्रपुर और काशीपुर सर्किल में जांच कर रही हैं, जबकि तीसरी टीम बाहरी जिलों और अन्य राज्यों से जारी किए गए लाइसेंसों का सत्यापन कर रही है.
