राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज गौलापार हल्द्वानी स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। शिलान्यास और प्रथम शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और युवाओं की ऊर्जा खेलों के लिए अनुकूल हैं, आवश्यकता केवल प्रतिभा को सही मंच और आधुनिक संसाधन देने की है।क्रीड़ा विश्वविद्यालय प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगा।राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करते हुए ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रतिभाओं को मंच, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों एवं उनके प्रशिक्षकों को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार एवं हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किए। उल्लेखनीय हैं कि विगत कुछ वर्षो से राज्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण खेल-अवसंरचना का विकास हुआ हैं और सरकार द्वारा खेल व खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न योजनाओ को क्रियान्वित किया हैं, 38वें राष्ट्रीय खेलों में अपेक्षाकृत छोटे राज्य का 103 पदक तक पहुंचना बताता है कि राज्य में प्रतिभा का आधार मजबूत है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदर्शन केवल एक-दो खेलों तक सीमित नहीं रहा।एथेलेटिक्स ,बॉक्सिंग शूटिंग, हॉकी, बैडमिंटन, वॉटर स्पोर्ट्स, फुटबॉल, तीरंदाजी और मार्शल आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में भी राज्य के खिलाड़ियों की उपस्थिति बढ़ी है। महत्वपूर्ण दीर्घकालीन पहल के तहत उत्तराखण्ड राज्य खेल विश्वविद्यालय स्थापित हुआ है और खेल विज्ञान, खेल शिक्षा, कोचिंग तथा खेल प्रबंधन पर केंद्रित है। इसके परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम, ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल और हॉकी टर्फ जैसी सुविधाएं हैं। उत्तराखण्ड ने “खेल आयोजन” से “खेल संस्कृति” की ओर कदम बढ़ा दिया है; अब उसे “खेल संस्कृति” से “अंतरराष्ट्रीय खेल शक्ति” बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।