नीट-यूजी परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे लंबे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने सम्बन्धी समाचार व्यापक रूप में चर्चित है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड में भी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक केंद्र स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक राज्यों में बैठे शिक्षा माफियाओं और पेपर लीक गिरोहों पर लगाम कसना मुश्किल होगा। आम आदमी पार्टी और अन्य स्थानीय संगठनों ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को छात्रों की जीत बताया और कहा कि उत्तराखंड में भी पूर्व की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे उत्तराखंड के युवाओं और छात्र संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता और सख्त प्रशासनिक सुधारों की वकालत की।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल परीक्षा दोबारा कराना काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे तंत्र की उच्च-स्तरीय और निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में युवाओं का भविष्य दांव पर न लगे।
