अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के आधार पर जून 2025 से जून 2026 तक की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 5.32 प्रतिशत (अनंतिम) है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित मुद्रास्फीति दरें क्रमशः 5.45 और 5.09 प्रतिशत हैं।
जून में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.32% हो गई, जबकि मई में यह 4.38% थी। इसका अर्थ है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की रफ्तार तेज हुई है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित सूचना का आम लोगों पर प्रभाव:
* रसोई का मासिक बजट बढ़ सकता है।
* निम्न एवं मध्यम आय वर्ग पर अधिक आर्थिक दबाव पड़ता है।
* यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो समग्र महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि खाद्य मुद्रास्फीति केवल खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाती है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ) मुद्रास्फीति में खाद्य पदार्थों के साथ-साथ आवास, ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि भी शामिल होते हैं। इसलिए खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि समग्र मुद्रास्फीति भी उसी अनुपात में बढ़ी हो, हालांकि इसका उस पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
