देहरादून के प्रेमनगर (नंदा की चौकी) के पास टौंस नदी पर बना ₹16 करोड़ की लागत वाला नया पुल उद्घाटन के महज 16-17 दिन बाद ही (28 जुलाई 2026 को) भारी बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि मुख्य पुल सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड धंसी है, लेकिन इस घटना ने निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि ३० जून को कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मौके पर पहुंचकर इस पुल के पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सतपाल महाराज ने कहा था कि पुल के सुरक्षात्मक और पुनर्निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई द्वारा किया जा रहा है। निर्माण कार्य में ओपन फाउंडेशन के बजाय अत्यधिक सुरक्षित ‘वेल फाउंडेशन’ तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
सितंबर 2025 की बाढ़ में पुराना पुल टूटने के बाद इसे लगभग ₹16 करोड़ की लागत से तैयार किया गया था। यह पुल करीब 300 दिन के इंतजार के बाद 12 जुलाई 2026 को जनता के लिए खोला गया था। 28 जुलाई 2026 की मूसलाधार बारिश के बाद पुल की एप्रोच रोड में एक बड़ा और खतरनाक गड्ढा बन गया, जिससे देहरादून-पांवटा साहिब राजमार्ग पर यातायात रोकना पड़ा। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग प्रेमनगर, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के लिए आते-जाते हैं, जिन्हें अब भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
मात्र 17 दिनों के भीतर पहली ही बड़ी मानसूनी बारिश में सड़क का धंस जाना निर्माण और सामग्री की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। जनता और स्थानीय लोगों का कहना है कि एक साल तक काम चलने के बाद भी यदि सड़क इतनी कमजोर थी, तो इसकी मॉनिटरिंग ठीक से नहीं की गई।
