लिशु इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डॉ. टी. जी. नेगी ने पुलिस अधीक्षक (देहात), देहरादून को शिकायत पत्र सौंपकर भूमि से संबंधित कथित धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अवैध कब्जे और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार संस्थान ने वर्ष 2009 में खसरा संख्या 333 ग, रकबा 440 वर्गमीटर भूमि विधिवत पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से खरीदी थी। संस्थान का दावा है कि संबंधित भूमि का स्वामित्व प्रमाण पत्र भी सक्षम राजस्व अधिकारियों द्वारा जारी किया जा चुका है।
डॉ. नेगी ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उक्त भूमि का दोबारा विक्रय दिखाया गया तथा भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि हाल ही में जेसीबी मशीन के माध्यम से भूमि पर अतिक्रमण कर वहां लगी फसल, पाइपलाइन और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
संस्थान ने आरोप लगाया है कि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी कर गलत तरीके से स्वामित्व स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे संस्थान को आर्थिक एवं कानूनी क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
लिशु इंस्टीट्यूट ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही संस्थान ने अपनी भूमि और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
संस्थान का कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और अधिक नुकसान होने की आशंका बनी रहेगी। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का माहौल है और शिकायतकर्ताओं को जांच के परिणाम का इंतजार है।
