आधिकारिक और सुरक्षित रूप से कैलाश मानसरोवर यात्रा को संपन्न करने के लिए, भारत सरकार का विदेश मंत्रालय हर साल विभिन्न मार्गों (जैसे उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे या सिक्किम के नाथू ला) से यात्रा आयोजित करता है। राज्य क्षेत्र से आयोजित हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले दल में सम्मिलित 48 यात्रियों (15 महिला और 34 पुरुष) ने आज नाभीढांग पहुंचकर ओम पर्वत के दर्शन के उपरांत नाभीढांग में विश्राम किया जा रहा हैं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 जुलाई को यात्री लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन सीमा स्थित तकलाकोट में प्रवेश करेंगे जहां आईटीबीपी उन्हें चीन प्रशासन के सुपुर्द करेंगे।
कैलाश पर्वत की इस यात्रा का महत्व धार्मिक दृष्टि से बहुत अधिक है।कैलाश मानसरोवर यात्रा को आध्यात्मिकता, शांति और मोक्ष का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है यह यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं है, बल्कि चार प्रमुख धर्मों—हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन—के लिए गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती है।.
ज्योतिष के अनुसार, इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा में एक विशेष संयोग बना है। 60 सालों के बाद अग्नि अश्व वर्ष का योग इस वर्ष बन रहा है। इसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में मोक्ष प्राप्ति का सबसे बड़ा द्वार माना जाता है। इसलिए इस साल तीनों धर्मों के लोग इस यात्रा में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। तिब्बती ज्योतिषी दौलत रायपा ने बताया कि यह साल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका संबंध अग्नि तत्व और अश्व राशि से है।इस वर्ष की यात्रा के दौरान, अश्व वर्ष में की गई एक परिक्रमा का फल सामान्य वर्षों में की गई 12 परिक्रमा के बराबर माना जाता है। भगवान बुद्ध का जन्म और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति इसी अश्व वर्ष में हुई थी। ऐसे में, इस विशेष योग के चलते लोग अधिक संख्या में इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।
