जहा चारधाम यात्रा इस साल रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है वही इस उत्साह के बीच यात्रा के दौरान हुई मौतों का आंकड़ा भी चिंता का विषय बन रहा है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार,प्रचलित चारधाम यात्रा में अब तक 40 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है, जिनमें से सबसे अधिक संख्या 22 केदारनाथ धाम की हैं। अन्य धामों में से बद्रीनाथ में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री में 5 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है।इसमें अधिकांश 50वर्ष से अधिक है।
चिकित्सकों के अनुसार श्रद्धालुओ की मृत्यु के प्रमुख कारण हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और अन्य स्वास्थ्य कारण रहे हैं हैं। चारों तीर्थस्थल ऊंचे हिमालयी इलाके में लगभग 3,000 मीटर की ऊंचाई पर हैं।उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से बुजुर्ग और पहले से बीमार श्रद्धालुओं को अधिक परेशानी हो रही है।
उत्तराखंड हेल्थ डिपार्टमेंट ने पहले एक हेल्थ एडवाइज़री जारी की थी, जिसमें बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों से यात्रा शुरू करने से पहले मेडिकल चेक-अप करवाने को कहा गया था। स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था के दावो के उपरांत भी श्रद्धालुओं की मौतों के आंकड़े सरकार की तैयारी पर सवाल खड़े कर रहे हैं।यात्रा मार्ग पर 47 अस्पतालों के साथ-साथ 2820 स्वास्थ्य कर्मियों और 400 डॉक्टरों की तैनाती की गई है। डॉक्टरों को खास ट्रेनिंग दी गई है कि वे हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर मरीजों का इलाज कैसे करें।
सरकार यात्रा मार्ग पर ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना बना रही है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर खोले जाने की तैयारी चल रही है, इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं या स्वास्थ्य आपात स्थितियों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर इलाज सुनिश्चित करना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियाँ बचाई जा सकें। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि यात्री अक्सर अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेज़ गति से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जिससे हार्ट अटैक और उच्च ऊँचाई से जुड़ी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
