पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर उत्तराखंड के स्थानीय बाजारों पर पेट्रोल-डीजल व रसोई के तेल के दामों में भारी उछाल, औद्योगिक उत्पादन की लागत में वृद्धि और शेयर बाजार में गिरावट के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।उत्तराखंड के बाजारों और अर्थव्यवस्था पर पड़े इस प्रभाव के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं: ईंधन और माल भाड़े में उछाल: कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल सहित पूरे राज्य में पेट्रोल और डीजल के दाम काफी बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर माल ढुलाई और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के परिवहन पर पड़ा है।
औद्योगिक उत्पादन (सिडकुल) प्रभावित: इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अनुसार, सिडकुल (रुद्रपुर, सितारगंज, सेलाकुई) की विनिर्माण इकाइयों को कच्चे माल की कमी और महंगी इनपुट लागत का सामना करना पड़ रहा है। एक्सपोर्ट (निर्यात) के नए ऑर्डर्स मिलने में भारी कमी आई है। राजस्व और निर्यात को झटका: पश्चिम एशिया को होने वाले उत्तराखंड के प्रीमियम ट्राउट) मछली निर्यात का लक्ष्य बाधित हुआ है, जिससे राज्य के मत्स्य और ग्रामीण उद्योगों की रणनीतियां प्रभावित हुई हैं। बजट और महंगाई की मार: रसोई गैस, सीएनजी और खाने के तेल की बढ़ती कीमतों ने आम जनता के किचन बजट को बिगाड़ दिया है।
सरकारी सतर्कता और ऊर्जा संरक्षण: हालात के मद्देनजर उत्तराखंड सरकार ने राज्य में ऊर्जा संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए ‘नो व्हीकल डे’ और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे कदमों को लागू करना शुरू कर दिया है। बढ़ते वैश्विक तनाव को देखते हुए राज्य के उद्योग और व्यापार मंडल वैकल्पिक मार्गों और स्थानीय संसाधनों को मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं।कारोबारी बताते हैं कि खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित होने के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो रिफाइंड तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि ईरान से आने वाले पिस्ता पर भी संकट गहरा गया है।
सप्लाई घटने से पिस्ता एक हजार रुपये प्रति किलो तक महंगा हो चुका है। वर्तमान में बाजार में पिस्ता करीब 3400 रुपये किलो बिक रहा है।सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह महंगाई केवल ड्राई फ्रूट या ब्रांडेड तेल तक सीमित नहीं रहने वाली है। यदि खाड़ी देशों में हालात और बिगड़े तो इसका असर रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों, मिठाइयों, स्नैक्स और होटल उद्योग पर भी पड़ेगा। कारोबारी मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में खाने की थाली और महंगी हो सकती है।
