‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ से न केवल दिल्ली और देहरादून के मध्य का सफर आसान किया हैं अपितु इस एक्सप्रेस वे से सहारनपुर, शामली ,बड़ौत बागपत जैसे टियर-2 शहरों में निवेश का माहौल बनेगा और सही मायनों में इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में स्थापित होने की संभावना हैं और यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास और इन क्षेत्रों में निवेश सुनहरे भविष्य का संकेतक है. रियल एस्टेट विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस मार्ग अगले दो वर्षों में यहां संपत्तियों की कीमतों में 25% तक का उछाल आ सकता है. लेकिन यह तेजी सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है. आईटी पार्क्स और हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स की आहट इस पूरे गलियारे को एक डायनामिक इकोनॉमिक बेल्ट में तब्दील कर रही है.
इस परियोजना से उत्तराखंड राज्य पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावो में से सर्वाधिक प्रभाव् पर्यटन एवं उससे जुड़े व्यवसायो पर दिखेगा , जो राज्य की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से सकारात्मक हैं। .प्रधानमंत्री ने भी उद्घाटन के दौरान कहा था कि “जब पर्यटन बढ़ता है तो पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।” यह भी सत्य हैं कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है।यह एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” सिद्ध हो सकता है।
‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ से लॉजिस्टिक्स और व्यापार में तेजी आएगी :
•माल परिवहन तेज और सस्ता होगा।
•कृषि उत्पाद, डेयरी और बागवानी उत्पाद बाजार तक शीघ्र पहुंच सकेंगे।
•परिवहन लागत घटने से स्थानीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
•वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट हब और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित होने की संभावना है।
अच्छी कनेक्टिविटी से औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा-
•देहरादून–हरिद्वार औद्योगिक क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा।
•IT, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और शिक्षा क्षेत्र में नए अवसर बन सकते हैं।
•SIDCUL क्षेत्रों की उपयोगिता और बढ़ेगी।
पर्यटन,परिवहन,होटल उद्योग,निर्माण,रियल एस्टेट,लॉजिस्टिक्स आदि क्षेत्रों में स्थायी रोजगार बढ़ने की संभावना है। राज्य को पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र आधारित विकास की दिशा में ले जा सकता है,यह मार्ग चारधाम हाईवे नेटवर्क से जुड़ता है, जिससे धार्मिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
परन्तु राज्य के नीति निर्माताओं को एक्सप्रेसवे के प्रभाव से संभावित चुनौतियाँ-अनियोजित शहरी विस्तार,देहरादून में ट्रैफिक और जल संकट बढ़ने का खतरा,पर्यावरणीय दबाव,सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव आदि का आंकलन एवं परिक्षण कर नियोजित शहरी विकास,पर्यावरण संरक्षण,स्थानीय रोजगार,और सतत पर्यटन नीति आदि पर ध्यान देना होगा।
