
कोटद्वार के चर्चित ‘मोहम्मद दीपक’ प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 31 अगस्त को अंतरिम आदेश पारित करते हुए दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज FIR से संबंधित आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के संचालन पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत दीपक को मामले से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, संदेश अथवा वीडियो जारी करने से रोका गया था।
यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केवल FIR की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई है; FIR को अभी निरस्त नहीं किया गया है। इसलिए इसे दीपक को मामले में अंतिम क्लीन चिट के रूप में देखना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा।
मामला 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में हुई एक घटना से जुड़ा है।दीपक कुमार और उनके सहयोगी के खिलाफ कोटद्वार थाने में 31 जनवरी 2026 को FIR संख्या 19/2026 दर्ज की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले का केंद्र धीरे-धीरे घटना के सामाजिक-राजनीतिक पक्ष से हटकर कानूनी प्रक्रिया और मौलिक अधिकारों की ओर जाता दिखाई दे रहा है।विशेष रूप से यह प्रश्न महत्वपूर्ण रहेगा कि जांच के दौरान किसी आरोपी के सार्वजनिक वक्तव्य को किस सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है और ऐसी रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा निष्पक्ष जांच के बीच संतुलन कैसे स्थापित करे।
सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए रास्ता खुला रखा है। उस समय राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सामने आने के बाद अदालत FIR निरस्तीकरण की याचिका पर आगे विचार करेगी
