कोविड-19 महामारी और सीमा तनाव के कारण करीब छह वर्षों तक बंद रहने के बाद अगस्त 2026 में भारत-चीन (तिब्बत) सीमांत व्यापार दोबारा बहाल हुआ। व्यापार की शुरुआत में ही चीनी प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण एक गंभीर व्यावहारिक अड़चन खड़ी हो गई है। चीनी अधिकारियों ने भारतीय व्यापारियों को तिब्बत की तकलाकोट मंडी में नया माल (जैसे गुड़, मिश्री, कॉस्मेटिक आदि) ले जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
मुख्य व्यावहारिक अड़चनें और मौजूदा संकट
• नया माल ले जाने पर प्रतिबंध: चीनी प्रशासन ने भारतीय व्यापारियों को केवल पुराना माल निकालने की अनुमति दी है और नया सामान बॉर्डर पार ले जाने पर रोक लगा दी है।
• करोड़ों का माल गुंजी में फंसा: चीनी मंजूरी न मिलने के कारण भारतीय व्यापारियों द्वारा ऋण लेकर खरीदा गया करोड़ों रुपये का नया सामान सीमांत भारतीय क्षेत्र गुंजी में ही खुले और अस्थायी इंतजामों में सड़ रहा है।
• व्यापारी तकलाकोट में खाली बैठे: बिना नए सामान के तिब्बत की तकलाकोट मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारियों और उनके सहायकों का पहला दल वहां दुकानों पर हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
• चीनी बुनियादी ढांचे की कमी: व्यापार की शुरुआत में देरी का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि तकलाकोट (पुरांग काउंटी) में चीन की ओर से नई मंडी, गोदामों और दुकानों की व्यवस्था समय पर पूरी नहीं की गई थी।
• सरकारों की रहस्यमयी चुप्पी: इस गंभीर व्यावहारिक संकट पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व और चीनी प्रशासन ने पूरी तरह से मौन साधा हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन भी लाचार नजर आ रहा है।
चूंकि यह पारंपरिक सीमा व्यापार केवल जून से अक्टूबर की सीमित अवधि के लिए ही चलता है, इसलिए इस अड़चन के कारण भारतीय कारोबारियों की पूरी जमा-पूंजी और व्यापारिक सीजन डूबने की कगार पर पहुंच गया है। भारतीय व्यापारी अब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से चीनी अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को उठाकर ठोस कूटनीतिक पहल करने की मांग कर रहे हैं
