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राजकीय मेडिकल कॉलेज देहरादून में एनाटॉमी विभाग के एक प्रथम वर्ष के जूनियर पीजी डॉक्टर ने तृतीय वर्ष के सीनियर डॉक्टरों पर पिछले छह महीने से टॉक्सिक व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। विवाद तब शुरू हुआ जब जूनियर ने एक कॉमन ग्लास से पानी पी लिया था। कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने सीधे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) में शिकायत की, जिसके बाद कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू कर दी हैं ।
प्राचार्य, डॉ. गीता जैन का कहना हैं कि एंटी रैगिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज प्रबंधन रैगिंग जैसी गंभीर घटनाओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा जीरो टॉलरेंस की नीति और घटित रैगिंग की घटनाओ में आरोपी छात्रों को निलंबित या निष्कासित किये जाने के बाद भी रैगिंग पर अंकुश नहीं लगना चिंता का विषय हैं। वर्ष 2026 के दौरान रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं।
मार्च-अप्रैल 2026 (बाल और दाढ़ी कटवाने का दबाव): एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक जूनियर छात्र ने सीनियर्स पर बाल और दाढ़ी कटवाने के साथ हेयरकट का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।
जनवरी 2026 (मारपीट और हॉस्टल निष्कासन): 12 जनवरी को 2025 बैच के एक छात्र के साथ हॉस्टल में गंभीर रैगिंग व मारपीट की घटना हुई। सीनियर्स द्वारा बेल्ट व चप्पलों से पीटने और बाल काटने का दबाव बनाने का मामला सामने आया। घटना पर दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 9 एमबीबीएस सीनियर छात्रों को हॉस्टल और कक्षाओं से निलंबित/निष्कासित किया।दो मुख्य आरोपी छात्रों पर 50,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना, दो महीने के लिए कक्षाओं से निलंबन तथा पूरे कोर्स व इंटर्नशिप से निष्कासन जैसी कड़ी सजा दी गई। अन्य 7 छात्रों को भी हॉस्टल और कक्षाओं से निलंबित किया गया।
