ईरान-अमेरिका संघर्ष की वास्तविक कीमत केवल युद्ध में नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप, गैस सिलेंडर, सब्ज़ी मंडी और किराने की दुकान पर दिखाई दे रही है। तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे परिवहन, रसोई गैस और खाद्य वस्तुओं की लागत बढ़ाकर आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ा रहा है।
व्यापक पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव हमारे किचन पर पढ़ने के निम्न कारण है:
1.भारत अपनी लगभग 85% तेल आवश्यकता आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो रहा है।हाल के दिनों में तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया है क्योंकि आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है।
2.तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से घरेलू गैस की लागत पर दबाव बढ़ रहा है।घरेलू और व्यवसायिक सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि भी दर्ज की गई है।
3. खाद्य पदार्थों डीज़ल और परिवहन लागत बढ़ने से सब्ज़ी, फल, दूध, आटा, दाल और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतो में वृद्धि परिलक्षित हैं। कई उपभोक्ता वस्तु कंपनियां लागत बढ़ने पर पैकेट का आकार घटाने या कीमत बढ़ाने का रास्ता अपनाती हैं।
तेल महंगा होने से उर्वरक, पैकेजिंग, बिजली उत्पादन और औद्योगिक लागत भी बढ़ती है, जिसका असर अंततः खाद्य वस्तुओं पर पड़ता है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता
यदि Strait of Hormuz में लंबे समय तक व्यवधान होता है, तो तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत सहित एशिया के कई देश इस मार्ग से आने वाले ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
