प्रधानमंत्री मोदी के आभूषणों की खरीदारी न करने की अपील के बाद उत्तराखण्ड में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। विशेषकर देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी के सर्राफा व्यापारियों ने इस अपील पर चिंता व्यक्त की है।स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की अपील से उनके कारोबार को आर्थिक नुकसान की आशंका व्यक्त करते हुए सराफा कारोबारी द्वारा आज प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं ।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि यदि लोग लंबे समय तक सोने की खरीदारी रोकते हैं तो स्थानीय व्यापार, रोजगार और शादी-विवाह आधारित बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कुछ व्यापारियों ने इसे प्रतीकात्मक विरोध के रूप में भी उठाया। दूसरी ओर, कुछ सामाजिक एवं व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री की अपील को राष्ट्रीय हित और विदेशी मुद्रा संरक्षण से जोड़कर समर्थन दिया है। उनका मानना है कि मध्य-पूर्व तनाव और बढ़ते आयात बिल के बीच यह कदम आर्थिक संतुलन बनाने का प्रयास है।
•सर्राफा व्यापारियों की चिंता है कि उत्तराखण्ड में विवाह एवं पारंपरिक आयोजनों में सोने की खरीद सामाजिक आवश्यकता मानी जाती है। ऐसे में मांग घटने से छोटे ज्वेलर्स और कारीगर प्रभावित हो सकते हैं।
•कारीगरों एवं रोजगार पर असर की आशंका: देहरादून और हरिद्वार के व्यापारिक वर्ग का कहना है कि ज्वेलरी उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है।
•राष्ट्रीय हित में समर्थन: कुछ नागरिकों एवं भाजपा समर्थक संगठनों ने इसे “देशहित में त्याग” बताते हुए समर्थन दिया। उनका तर्क है कि सोने का भारी आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है।
•द्योग जगत ने पुराने सोने की रीसाइक्लिंग, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और सीमित खरीद जैसे विकल्प सुझाए हैं, ताकि व्यापार और अर्थव्यवस्था दोनों संतुलित रह सकें।
कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री की अपील को लेकर भावनात्मक समर्थन तो दिखा, लेकिन व्यापारिक समुदाय ने इसके आर्थिक दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता भी व्यक्त की है।
