नेपाल में माह सितंबर 2025 महीने में “जेन ज़ी आंदोलन” के बाद घटित सामाजिक एवं राजनितिक घटनाक्रम के उपरांत पाँच मार्च को हुए संसदीय चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया और बालेन शाह ने 27 मार्च को नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप शपथ लेने के कुछ घंटों के भीतर ही कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई और चार बड़े फैसले लिए जिसने पूरे नेपाल को हिला दिया।
बालेन शाह को लेकर भारत में उम्मीद थी कि संबंधों में गर्मजोशी आएगी, लेकिन बालेन शाह ने भारत को लेकर न तो कोई जल्दबाज़ी दिखाई और न ही बहुत उत्साह दिखाया. नेपाली मीडिया में इस बात की बहुत चर्चा हुई कि काठमांडू में भारत के राजदूत बालेन शाह से मिलकर बधाई देना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.पहले यह बहुत ही आम था कि भारत का राजदूत नेपाल के नए प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से मिलकर बधाई देता था.बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से व्यक्तिगत मुलाक़ात की परंपरा तोड़ दी।
प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार द्वारा लिए गए कई फैसलों को भारत विरोधी और विवादित माना जाता रहा है। इन फैसलों के कारण भारत और नेपाल के बीच व्यापार और राजनीतिक संबंधों में कई बार गतिरोध देखने को मिला है | इस निर्णयों में से, घरेलू सामान पर सीमा शुल्क वसूलने,लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताने और कालापानी और लिपुलेख के क्षेत्रों पर नेपाल का दावा का उत्तराखंड से सीधा सम्बन्ध हैं
भारत-नेपाल सीमा पर आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों द्वारा लाए जाने वाले मात्र ₹100 से अधिक मूल्य के रोजमर्रा के घरेलू सामान पर सीमा शुल्क वसूलने का विवादास्पद नियम |
प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने अपने कार्यालय में कथित ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाया | इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का मुख्य कारण है |
मानसरोवर यात्रा और सीमा क्षेत्रों से जुड़े पुराने मुद्दों पर चीन का समर्थन करते हुए कालापानी और लिपुलेख के क्षेत्रों पर नेपाल का दावा फिर से मुखर किया, जिसे भारत ने अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला कदम माना।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की निर्धारित नेपाल यात्रा के दौरान उनसे मिलने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण यह दौरा रद्द हो गया।
