पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है. मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य की चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की गंभीर साजिश का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी ने दावा किया है कि बंगाल में ‘वोटर हाइजैकिंग’ के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने पत्र की प्रति साझा करते हुए भाजपा पर सीधा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंटों को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में हजारों फर्जी ‘फॉर्म 6’ (नया वोटर आईडी आवेदन) जमा करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है. उन्होंने लिखा, “यह गैर-निवासियों और बाहरी लोगों को बंगाल की मतदाता सूची में घुसाने का प्रयास है. यह वही गंदा खेल है जो भाजपा ने महाराष्ट्र और दिल्ली में सफलतापूर्वक खेला था.”
तीन पन्नों के अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग की वर्तमान कार्रवाइयों से बंगाल के वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने 20 फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें “अनमैप्ड श्रेणी” के तहत मतदाता आवेदनों के निष्पक्ष निपटारे की बात कही गई थी. ममता ने मांग की है कि लंबित दावों की समीक्षा के लिए बेदाग छवि वाले सेवारत या पूर्व जिला न्यायाधीशों की निगरानी में एक न्यायिक कमेटी बनाई जाए.
ममता बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए कहा, “यह सामान्य आवेदन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि चुनाव जीतने के लिए मतदाता आधार को बदलने की कोशिश है. बंगाल दिनदहाड़े अपने लोकतंत्र की चोरी नहीं होने देगा. राज्य की जनता सब देख रही है.” उन्होंने मांग की है कि 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद किसी भी नए या संदिग्ध मतदाता को जोड़ने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए.
