उच्च न्यायालय उत्तराखंड को नैनीताल से स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर प्रचलित विवाद में एक नया मोड़ आया हैं। उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता कौशल साह ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से गौलापार (हल्द्वानी ) स्थानांतरित करने के प्रस्ताव और प्रक्रिया के खिलाफ वन अधिनियम 1980 एवं वन संरक्षण नियम 2023 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
यह शिकायत जिला प्रशासन के प्रस्ताव और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर की गई है।पत्र में हाईकोर्ट को गौलापार स्थानांतरित करने से पर्यावरण और वन्यजीव संकट उत्पन्न होने का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित भूमि (बेल बाबा मंदिर के पास, गौलापार क्षेत्र) को आरक्षित वन क्षेत्र तथा एशियाई हाथियों के गलियारे (एलीफेंट कॉरिडोर) के लिए संवेदनशील बताया गया है। शिकायती पत्र में यह भी आरोप है कि बिना आवश्यक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों के ही उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है। नैनीताल से कोर्ट के हटने से स्थानीय आजीविका और व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही गई है।
जुलाई 2026 में, सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें शिफ्टिंग से पहले वकीलों और वादकारियों की राय/जनमत संग्रह कराने को कहा गया था।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे से जुड़े ऐसे प्रशासनिक निर्णय राज्य सरकार और हाईकोर्ट को आपसी परामर्श से तय करने चाहिए तथा राज्य को 6 सप्ताह के भीतर भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
कौशल साह (कौशल साह जगती) उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के एक सक्रिय अधिवक्ता हैं, जो वर्ष 2011 से वकालत कर रहे हैं।
