प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित में आत्म निर्भर भारत उत्सव में ‘एक जिला एक उत्पाद’ अवार्ड्स में कृषि श्रेणी में सम्पूर्ण भारत के लगभग 500 जिलों के बीच मुकाबले में उत्तरकाशी के विशिष्ट लाल चावल को फर्स्ट रनर-अप स्थान मिला है।केंद्रीय विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी अभिषेक रूहेला को फर्स्ट रनर अप का पुरस्कार प्रदान किया।
वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत उत्तरकाशी जिले से लाल धान को जिला प्रशासन, कृषि विभाग एवं उद्योग विभाग ने राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु के लिए गत अगस्त माह में भारत सरकार से आवेदन किया था। जिसके बाद भारत सरकार के दल ने गत अक्टूबर व नवंबर माह में स्थलीय भ्रमण कर दावे को उपयुक्त पाया और लाल धान देश भर में सराहना और सम्मान का पात्र बना।
जनपद उत्तरकाशी की यमुना घाटी के रामा सिराई और कमल सिराई में परंपरागत रूप से बड़े पैमाने पर लाल धान की खेती की जाती है। रवांईं क्षेत्र में पुरोला ब्लॉक की कमल सिरांई और रामा सिरांई में लाल धान का सर्वाधिक उत्पादन होता है।इसके साथ नौगांव और मोरी ब्लॉक के निचले इलाकों में भी लाल धान उगाया जाता है. इन इलाकों में लाल धान की सालाना उपज करीब 3000 टन है।
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर लाल चावल की रंगत और अनूठा स्वाद इसको आम चावलों की तुलना में खास और कीमती बनाता है। लाल चावल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मोनो-अनसेचुरेटेड फैटी एसिड, विटामिन और जिंक,आयरन जैसे खनिज और पॉलीफेनोल्स से भरपूर है।मधुमेह के रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से लाल चावल को वैक्यूम पैकेजिंग में बड़े सुपरमार्केट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और विदेशों में निर्यात किया जा रहा है।इसकी देश-विदेश में काफी मांग है। लाल चावल को हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI) टैग भी मिल चुका है।
इस राष्ट्रीय पहचान से किसानों की आय में वृद्धि हुई है और क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिला हैं।
