यूनेस्को की विश्व धरोहर, उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ आधिकारिक तौर पर 1 जून से पर्यटकों के लिए खुलने जा रही है और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक यह पर्यटकों के लिए खुलेगी। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों और रंग-बिरंगे फूलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ में हर साल हजारों पर्यटक व ट्रेकर्स यहां पहुंचते हैं।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन द्वारा घाटी तक पहुँचने वाले पैदल मार्गों , अस्थायी पुलों,सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं को सुचारू कर लिया गया है जिससे कि इस वर्ष आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।घाटी के निरीक्षण को गयी वन विभाग की टीम के अनुसार फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पर्यटको को कई दुर्लभ और रंगीन फूलों की प्रजातियां देखने को मिलेंगी। इस बार घाटी की सैर के दौरान पर्यटक लेगी नाले में हिमखंड का दीदार भी कर सकेंगे।
चमोली जिले में समुद्रतल से 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण है।ट्रेक की शुरुआत गोविंदघाट से होती है, जहाँ से घांघरिया (बेस कैंप) तक लगभग 16 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। घांघरिया से 3 किलोमीटर आगे फूलों की घाटी शुरू होती है। पार्क प्रतिदिन सुबह 7:00 बजे खुलता है और अंतिम प्रवेश दोपहर 2:00 बजे तक होता है。आगंतुकों को दोपहर 1:00 बजे तक अपनी वापसी यात्रा शुरू करनी होगी और शाम 5:00 बजे तक अनिवार्य रूप से बाहर निकलना होगा नेशनल पार्क के अंदर रात में रुकने की अनुमति नहीं है।
