गर्मी बढ़ने के साथ पिछले कुछ दिनों से राज्य के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई हैं। कई इलाकों में भीषण वनाग्नि के कारण जहाँ वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है वही जनहानि की भी घटनाये सामने आ रही हैं । श्रीनगर के कीर्तिनगर ब्लाक डांगचौरा क्षेत्र में जंगल में लगी आग को बुझाते समय एक महिला की झुलसकर मौत हो गई है,वहीं चमोली में भी जंगल की आग बुझाने के दौरान एक युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई है।
उत्तराखंड के जंगलो में वनाग्नि की विभीषिका के फलस्वरूप आ रही चुनोतियो के मध्य वन विभाग के अधिकारियों को जनगणना ड्यूटी में लगाए जाने को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रतिकूल रूप में लेते हुए हाफ उत्तराखंड से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वन अधिकारियों को गैर-वन कार्यों में क्यों लगाया गया हैं ?अधिकरण ने दीपिका खारी बनाम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एवं अन्य से जुड़े मामले में सुनवाई के बाद पीसीसीएफ को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए । शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि 25 मार्च को जारी राज्य सरकार के आदेश के तहत वन अधिकारियों को जनगणना कार्य में लगाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 15 मई 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि वन कर्मियों व वन विभाग के वाहनों का इस्तेमाल चुनाव, चारधाम यात्रा या अन्य गैर-वन गतिविधियों में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे जंगलों की सुरक्षा प आग नियंत्रण प्रभावित होता है।
