जनपद बागेश्वर की एक वीरांगना ,जिनके पति सिपाही मदन सिंह 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे, को लगभग छह दशक बाद लंबित आर्थिक देयकों के रूप में ₹28.45 लाख की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। यह राशि भारतीय सेना और सैनिक कल्याण विभाग के प्रयासों के बाद जारी की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहीद परिवार को मिलने वाली कुछ वित्तीय सहायता और लाभ लंबे समय से लंबित थे। मामले की समीक्षा के बाद संबंधित विभागों ने देय राशि का निर्धारण किया और भुगतान सुनिश्चित किया।
यह घटना न केवल शहीद परिवारों के अधिकारों की रक्षा का उदाहरण है, बल्कि उन मामलों की भी याद दिलाती है जिनमें युद्ध वीरांगनाओं को अपने वैधानिक लाभ प्राप्त करने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
यह मामला उत्तराखण्ड में शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति सरकारी एवं सैन्य संस्थाओं की जवाबदेही तथा कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
